ट्रेड परिचय सुरक्षा व सावधनियाँ | Introduction to Trade Safety and Precautions

ट्रेड परिचय सुरक्षा व सावधनियाँ | Introduction to Trade Safety and Precautions

 

दोस्तों इस पोस्ट में हम लोग बिल्कुल शुरू से ट्रेड परिचय सुरक्षा व सावधनियाँ | Introduction to Trade Safety and Precautions के बारे में जानने वाले हैं , तो चलिए शुरू करते हैं…

ट्रेड परिचय सुरक्षा व सावधनियाँ | Introduction to Trade Safety and Precautions

 
परिचय (Introduction) : आधुनिक युग मशीनों का युग है जिसमें विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न प्रकार की मशीनों का उपयोग किया जाता है। विभिन्न प्रकार के उद्योगों में विभिन्न प्रकार के पुर्जे (Parts) बनाए जाते हैं और आम कार्यों में लाए जाने वाली उपयोग की विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ निर्मित की जाती हैं। मशीन के पार्ट्स को साधारण कारीगर के हाथ द्वारा बनाने में बहुत अधिक समय, धन व शक्ति लगती है उन्हें मशीनों द्वारा बड़ी आसानी से बहुत कम समय में तैयार किया जा सकता है। एक पुर्जे (Part) को तैयार करने में कई प्रकार की क्रियाएँ करनी पड़ती हैं। प्रत्येक क्रिया को करने के लिए अलग-अलग संक्रियाएँ करनी पड़ती हैं और मशीनों की आवश्यकता होती है।
 जैसे- लेथ, ड्रिलिंग, प्लेनर, रिमिंग, सोल्डरिंग, फोर्जिंग, शीट मेटल, स्क्रेपिंग, वैल्डिंग आदि उपरोक्त सभी व्यवसायों का प्रशिक्षण आई.टी.आई. में दिया जाता है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (I.T.I.) में दाखिला लेने के लिए 10+2 शिक्षा पद्धति के अंतर्गत 10वीं कक्षा पास या उसके समकक्ष होना चाहिए।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में फिटर व्यवसाय के प्रशिक्षणार्थियों (Trainees) को निम्नलिखित कार्यों की ट्रेनिंग दी जाती है :
1. प्राथमिक कुशलता- प्राप्त करने के लिए निम्न कार्यों का ज्ञान दिया जाता है –
(i) सभी औज़ारों का उपयोग
(ii) फेसिंग,
(iii) प्लेन टर्निंग
(iv) स्टेप टर्निंग
(v) टेपर टर्निंग,
(vi) उत्केंद्रीय
(vii) ड्रिलिंग
(viii) रीमिंग
(ix) टेपिंग,
(४) बोरिंग
(ii) पार्टिंग ऑफ
(xii) नर्लिंग
(xiii) ग्रूविंग और अंडर कटिंग
(xiv) फार्म टर्निंग
(xv) थ्रेड कटिंग आदि।
2. द्वितीयक कुशलता- प्राप्त करने के लिए निम्न सहायक ट्रेड के विषय में भी ज्ञान दिया जाता है।
(i) धातु विज्ञान,
(ii) ग्राइंडिंग
(iii) कापिंग
(iv) रिलीविंग
(v) मिलिंग,
(vi) चाबी घाट
(vii) स्प्रिंग बनाना
(viii) स्पिनिंग,
(ix) ऊष्मा उपचार आदि-आदि।
3. मशीनों की मरम्मत व देखभाल- इस व्यवसाय में विभिन्न
मशीनों जैसे ड्रिलिंग मशीन, लेथ मशीन आदि के भिन्न-भिन्न पुर्जों को खोलना, मरम्मत करना और फिर जोड़ना, विभिन्न पुर्जों को ग्रीस, तेल आदि देना सिखाया जाता है।
कुशल फिटर बनने के लिए गुण- एक कुशल फिटर वही बन सकता है जिसकी फिटर व्यवसाय में रुचि हो, मेहनती हो और जिसमें काम करने की इच्छा हो।
फिटर (Fitter Full Form) का अर्थ निम्नलिखित संभव है :
F – Fitness (शारीरिक रूप से सुदृढ़)
I – Intelligent (मानसिक रूप से बुद्धिमान)
T- Talented (कार्य सीखने की योग्यता)
E- Efficient (कार्य करने में कुशल)
R- Regularity (नियमितता)।
फिटर को निम्नलिखित कार्यों में निपुण होना चाहिए :
(i) फाइलिंग (Filing)
(ii) कटिंग (Cutting)
(ii) ड्रिलिंग (Drilling)
(iv) मापना (Measuring)
(1) रीमिंग (Reaming)
(vi) टेपिंग (Tapping)
(vii) थ्रेडिंग (Threading)
(viii) वैल्डिंग (Welding)
(ix) ग्राइंडिंग (Grinding)
(x) मरम्मत (Maintenance)
(xi) टर्निंग (Turning)
(xii) खुरचना (Scraping) आदि।
फिटर अलग-अलग पार्ट्स को जोड़कर मशीन का रूप देता है
जिसमें कुछ कार्य उसे मशीन पर तथा कुछ बैंच पर भी करने पड़ते हैं।
1. बैंच फिटर (Bench Fitter)- आई०टी०आई० में फिटर व्यवसाय के अधिकतर कोर्स बैंच फिटर के होते हैं और पाठ्यक्रम भी बैंच फिटर का होता है। बैंच फिटर, एक मौलिक फिटर है, जो हर तरह की बेसिक जानकारी रखता है और अन्य फिटरों का कार्य भी सुचारू रूप से कर सकता है। बैंच फिटर को शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत होना चाहिए फिटर को 75% कार्य हाथ से करना पड़ता है तथा शेष 25% कार्य मशीनों पर करता है।
बैंच फिटर का अधिक कार्य रेती (File) से होता है। अतः एक बैंच फिटर को रेती प्रयोग करने का अधिक ज्ञान होना चाहिए, ताकि एक कुशल फिटर बन सके। सही फिटर ही सही अलाऊंस रखकर सही फिटिंग कर सकता है।
2. पाइप फिटर (Pipe Fitter)- ये फिटर घरेलू पानी की पाईप, गैस लाईन पाईप तथा प्लम्बर कार्य आदि करने में सक्षम होने चाहिये।
3. डाई फिटर (Die Fitter)- आधुनिक युग में लगभग सभी वस्तुओं को डाई के द्वारा ही मोल्ड किया जाता है। वस्तुओं की बनावट के अनुसार डाई तैयार की जाती है। डाई से कम समय में एक जैसी अनेक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं। I.T.I. में भी टूल एंड डाई मेकर के कोर्स होते हैं। परन्तु बैंच फिटर इस काम की जानकारी लेकर बड़ी कुशलता से कर सकता है। जो फिटर जिस कार्य में दक्षता प्राप्त कर लेता है उसे उसी प्रकार के नाम से पुकारा जाता है।
I.T.I से फिटर व्यवसाय में पास होने के बाद छात्र अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों में कार्य करते हैं तथा उसी लाइन में कुशल हो जाते हैं। कुशलता के आधार पर फिटर निम्नलिखित हो सकते हैं-
(i) मशीन टूल फिटर (Machine Tool Fitter)
(ii) ऑटो फिटर (Auto Fitter)
(iii) पेट्रोल या डीजल इंजन फिटर (Petrol or Diesel (iv) Engine Fitter)
(v) विधुत फिटर (Electric Fitter)
(vi) खान फिटर (Mining Fitter)
(vii) रेलवे में लोकोमोटिव फिटर (Locomotive Fitter in Railway)
(viii) टरबाइन फिटर (Turbine Fitter)
जल्द ही आगे अपडेट किये जाएंगे….

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